आपके घर में पड़ी ये आयुर्वेदिक चीज जिसके अनेक फायदे... इतनी बीमारियों से छुटकारा देती है है ।

अदरक

  आपके घर मे उपयोग में आने वाली ये चीज जिसके है अनेक फायदे बहुत सारी बीमारियों को जड़ से मिटा देती है ये उसे आज जाने इसके फायदे.........


       प्राचीन काल सेही भारत में प्रकृति प्रदत्त तीखी, चटपटी, स्वादिष्ट अदरक का औषधि में उपयोग किया जाता है, संस्कृत में इसे ‘श्रृंगवेर’ कहा गया है । आर्द्रक’ यानी ‘आर्द्र’ अर्थात् गीला। नम रहने तक यह अदरक तथा सूखने पर सोंठ बन जाती है। नम रूप में इसकी तासीर ठंडी व सोंठ रूप में गर्म होती है। इसे चरक संहिता में बलवर्द्धक कहा गया है। सूखने पर अदरक खराब नहीं होती। वजन में यह हल्की होती है।

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रासायनिक संगठन

पानी 80.9 प्रतिशत, प्रोटीन 2.3 प्रतिशत, चरबी 0.9 प्रतिशत, कार्बोदित पदार्थ 12.3 प्रतिशत, लौह 2.6 मि. ग्राम/ प्रति 100 ग्राम।


 * कोनसी बीमारियों मे उपियोगी *

    
  



      (1) खाँसी – खाँसी में अदरक का रस व शहद बराबर-बराबर मिलाकर दिन में दो बार चाटकर दूध या चाय पीने से सूखी तथा गीली खाँसी दोनों में ही आराम मिलता है।

     (2) फोड़े-फुन्सियों पर – गीली अदरक को घिसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं। इसे घिसकर गाँठों पर भी लगाया जाता है।
 
    (3) जलोदर – इसका ताजा रस जलोदर के रोगी को पिलाने से खूब आराम मिलता है क्योंकि इससे रोगी को पेशाब खूब आता है। इसको रोगी की आवश्यकता तथा सहनशक्ति के अनुसार ही पिलाना चाहिए। मशक की तरह फूले पेट में पानी भरने को जलोदर रोग कहते हैं और अदरक जलोदर का महान शत्रु है। पचास ग्राम अदरक कुचल कर रस निकालें। इसे सवेरे सालम मिश्री में मिलाकर पीने से लाभ होगा।




    (4) जोड़ों का दर्द – जोड़ों के दर्द में अदरक का रस 1 किलो, तिल्ली का तेल आधा किलो लेकर अंगीठी पर चढ़ाएं, जब उसमें सारा रस जल जाए तथा तेल मात्र शेष रह जाए तब उसे छानकर शीशी में भरकर रख लें। इसकी मालिश करने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।


     (5) भूख बढ़ाने के लिए – अदरक व नींबू का रस बराबर-बराबर मिलाकर पीने से भूख खुलती है। इसमें काला नमक, सेंधा नमक, काली मिर्च, नौसादर स्वादानुसार मिलाकर चाटने से गले में चिपका हुआ कफ आराम से निकल जाता है।




       खट्टी-मीठी चटनी, सलाद, मिर्च-मसालों, साग-सब्जियों, मूली व नीबू के साथ चाय के अन्दर, जूस या रस में उपयोगी अदरक सर्दी, जुकाम, खाँसी, ब्रोंकाइटिस, दमा, क्षय, अजीर्ण, अफारा, वात एवं कफ आदि अनेक दु:साध्य रोगों में भी नाना भाँति से उपयोगी है। अदरक पाक प्राय: बच्चों को सर्दी-खाँसी में दिया जाता है। अदरक को सुखाकर इसका चूर्ण भी अजीर्ण या पेट के रोग में प्राय: काले नमक के साथ खिलाते हैं। 25 ग्राम सोंठ, 100 ग्राम हरड़ व 15 ग्राम अजमोद कूट-पीसकर कपड़े से छानकर 3-4 ग्राम चूर्ण सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ लेने से गठिया रोग में लाभ होता है। .





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